14 सितंबर को हरितालिका तीज और गणेशोत्सव का महासंयोग, 11 दिन विराजेंगे गणपति बप्पा

हापुड़। इस वर्ष हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन पड़ने से श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक संयोग बन रहा है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से 14 सितंबर को निर्जला हरितालिका तीज का व्रत रखेंगी। इसी दिन घरों और पूजा पंडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना भी की जाएगी।
भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय काशी वाले के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह 7:08 बजे से शुरू होकर 14 सितंबर सुबह 7:07 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी, जो 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। धर्मग्रंथों और पंचांग के अनुसार हरितालिका तीज उदयातिथि का पर्व है, जबकि गणेश चतुर्थी का पूजन मध्यान्ह काल में किया जाता है। इस कारण 14 सितंबर को दोनों पर्वों का विशेष संयोग बन रहा है।
पंडित पाण्डेय ने बताया कि गणपति स्थापना के लिए 14 सितंबर को सुबह के राहुकाल के बाद सुबह 11:50 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक का समय विशेष शुभ माना गया है। इस दौरान अभिजीत मुहूर्त, स्थिर लग्न, ब्रह्म योग, चित्रा नक्षत्र और बुध की होरा का संयोग रहेगा। इसी अवधि में गणेशजी की स्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है।
इस बार 11 दिन चलेगा गणेशोत्सव
तृतीया और चतुर्थी के संयोग के कारण इस बार गणेश महोत्सव सामान्य 10 दिनों के बजाय 11 दिन तक चलेगा। गणपति विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार घरों में श्रद्धालु अपनी सुविधा और मान्यता के अनुसार एक, तीन, पांच या सात दिन के लिए भी गणपति की स्थापना कर सकते हैं।
गणेश पूजन में दूर्वा, रोली, कलावा, जनेऊ, मोदक, पान, सुपारी, केला, लौंग और इलायची अर्पित करने की परंपरा है। भगवान गणेश को तुलसी दल या तुलसी की माला अर्पित नहीं की जाती। स्थापना के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करने तथा ‘वक्रतुण्ड महाकाय…’ मंत्र से पूजा का शुभारंभ करने की सलाह दी गई है।
चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन करना निषिद्ध माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठा आरोप लगने और अपयश का योग बन सकता है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 14 सितंबर को चंद्रास्त लगभग रात 8:05 बजे बताया गया है। चतुर्थी व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सूर्यास्त के बाद बिना चंद्र दर्शन किए अर्घ्य देने की सलाह दी गई है। गलती से चंद्र दर्शन हो जाने पर निर्धारित मंत्र का जाप तथा स्यामंतक मणि की कथा पढ़ने-सुनने की धार्मिक परंपरा बताई गई है।
वहीं महासभा की महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय ने बताया कि हरितालिका तीज पर महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को प्रदोष बेला में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति के आरोग्य की कामना करेंगी, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे एवं योग्य वर की प्राप्ति के लिए पूजा-अर्चना करेंगी। पूजा में फल-मिष्ठान के साथ श्रृंगार सामग्री अर्पित करने और रात्रि में भजन-कीर्तन व जागरण की परंपरा है। तीज व्रत का पारण 15 सितंबर की सुबह किया जाएगा।



