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बुद्ध पूर्णिमा 2026: जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व-पंडित सुबोध पाण्डेय की खास जानकारी

हापुड़। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर इस वर्ष 1 मई 2026 (शुक्रवार) को व्रत, स्नान, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व बताया गया है। पंडित सुबोध पाण्डेय, प्रदेशाध्यक्ष, श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा (रजि.) ने बताया कि इस दिन वैशाख पूर्णिमा होने के कारण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इसी दिन भगवान सत्यनारायण का व्रत भी रखा जाएगा।

उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार उदयातिथि के आधार पर 1 मई को ही व्रत और पूजा करना उत्तम रहेगा। श्रद्धालुओं को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और संभव हो तो गंगाजल या पवित्र जल का उपयोग करना चाहिए। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर घर के मंदिर में दीप जलाकर भगवान सत्यनारायण की विधिवत पूजा करें। पूजा में पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करने के साथ मंत्र-जप और ध्यान करना लाभकारी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही पीपल के वृक्ष की पूजा और सेवा को भी अत्यंत शुभ बताया गया है। सूर्योदय के बाद पीपल के वृक्ष में जल और कच्चा दूध अर्पित करने से विशेष फल मिलता है।

पंडित पाण्डेय ने बताया कि इस दिन चंद्रमा तुला राशि में रहेगा और भद्रा सुबह 5:41 बजे से 10:00 बजे तक रहेगी, लेकिन इसका नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी लोक पर नहीं पड़ेगा। पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:15 से 4:58), अभिजीत मुहूर्त (11:52 से 12:45) और विजय मुहूर्त (2:31 से 3:24) विशेष रूप से शुभ हैं।

शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य माना गया है। चंद्र उदय लगभग शाम 6:19 से 6:57 बजे के बीच होगा, जिसके बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। इस दिन अहिंसा, सत्य, संयम और करुणा का पालन करने की भी सलाह दी गई है।

बुद्ध पूर्णिमा का यह पर्व श्रद्धा, साधना और दान-पुण्य के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।

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