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उत्तर भारत में ‘कोल्ड डे’ का कहर: शून्य दृश्यता और कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त

उत्तर भारत के विशाल हिस्से में कुदरत का कहर जारी है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत समूचा मैदानी इलाका इन दिनों भीषण ठंड और घने कोहरे की सफेद चादर में लिपटा हुआ है। मौसम विभाग (IMD) ने अधिकांश राज्यों में ‘कोल्ड डे’ से लेकर ‘सीवियर कोल्ड डे’ की स्थिति घोषित कर दी है। पहाड़ी क्षेत्रों से आ रही बर्फीली हवाओं ने मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है, जिससे न्यूनतम तापमान कई स्थानों पर 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। दिल्ली-एनसीआर में कोहरे का आलम यह है कि पालम और सफदरजंग जैसे क्षेत्रों में सुबह के समय दृश्यता (Visibility) शून्य से 50 मीटर के बीच दर्ज की गई है, जिससे सड़कों पर वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम गई है।

इस प्रतिकूल मौसम का सबसे बड़ा असर यातायात और विमान सेवाओं पर पड़ा है। घने कोहरे और कम दृश्यता के चलते विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने अपने यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवायजरी जारी की है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम के कारण उड़ानों के समय में भारी बदलाव या देरी हो सकती है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर ‘कैट-III’ (CAT-III) लैंडिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, फिर भी सैकड़ों उड़ानों के परिचालन पर असर पड़ा है। इंडिगो ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस ऑनलाइन चेक कर लें। यही हाल भारतीय रेलवे का भी है, जहाँ कोहरे के कारण लंबी दूरी की दर्जनों ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं।

भीषण ठंड के कारण जनजीवन और स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। यूपी और बिहार के कई जिलों में प्रशासन ने रैन बसेरों की संख्या बढ़ा दी है और चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह मौसम हृदय और सांस के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है, इसलिए लोग सुबह और रात की ठंड से बचें। कोहरे के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए पुलिस ने रिफ्लेक्टर और फॉग लाइट का उपयोग करने की सलाह दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 4-5 दिनों तक राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है और पछुआ हवाओं के कारण कनकनी और बढ़ सकती है। लोग इस कड़कड़ाती ठंड से बचने के लिए घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

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