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गैस संकट के बीच उद्योगों को राहत, 13 मई तक वैकल्पिक ईंधन की अनुमति

गाजियाबाद। प्रदेश में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में आई बाधा के चलते सरकार ने उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत दी है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने आदेश जारी करते हुए 13 मई तक वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की अनुमति प्रदान की है। इस निर्णय से उन इकाइयों को राहत मिलेगी, जिनकी कार्यप्रणाली प्राकृतिक गैस पर निर्भर है और आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा था।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के पूर्व निर्देशों के अनुरूप, अब उद्योग, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से प्राकृतिक गैस के स्थान पर हाई स्पीड डीजल (एचएसडी), बायोमास और रिफ्यूज्ड डेराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) जैसे वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल कर सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि आर्थिक गतिविधियां प्रभावित न हों और रोजगार पर भी कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करते समय पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एजेंसियों को निगरानी के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि कोई इकाई निर्धारित मानकों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि गैस आपूर्ति में आई यह अस्थायी समस्या जल्द ही दूर हो सकती है, लेकिन तब तक के लिए यह राहत उद्योगों के लिए संजीवनी साबित होगी। दूसरी ओर, पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता जताई है कि वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग से वायु गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है, इसलिए निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

सरकार का यह कदम संतुलन बनाने की दिशा में उठाया गया है, जिससे एक ओर औद्योगिक गतिविधियां जारी रह सकें और दूसरी ओर पर्यावरणीय मानकों का भी ध्यान रखा जा सके।

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