24 अप्रैल को मां बगलामुखी जयंती: पूजन विधि और चमत्कारी मंत्र जाने- ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से

हापुड़। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाई जाने वाली मां बगलामुखी जयंती इस वर्ष 24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी। यह दिन दस महाविद्याओं में आठवीं शक्तिशाली देवी मां बगलामुखी के प्रकट होने का पावन अवसर माना जाता है। मां बगलामुखी को ‘पीताम्बरा देवी’ और ‘स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री’ भी कहा जाता है, जो अपने भक्तों को शत्रुओं से रक्षा और विजय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
पंडित सुबोध पाण्डेय के अनुसार, अष्टमी तिथि 24 अप्रैल सुबह 07:18 बजे से प्रारंभ होकर 25 अप्रैल सुबह 05:51 बजे तक रहेगी। शुक्रवार का दिन देवी उपासना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है, जिससे इस बार यह संयोग और भी फलदायी हो गया है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मांड में विनाशकारी तूफान उत्पन्न हुआ, तब भगवान विष्णु की तपस्या से मां बगलामुखी का अवतरण हुआ, जिन्होंने उस विनाश को रोककर सृष्टि की रक्षा की। यही कारण है कि उन्हें नकारात्मक शक्तियों को निष्क्रिय करने वाली देवी माना जाता है।
पूजा के दौरान पीले रंग का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करें और हल्दी, पीले फूल, चने की दाल तथा पीले भोग अर्पित करें। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण है मंत्र जाप—
“ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा”
इस मंत्र का 108, 1008 या अधिक बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
इसके अतिरिक्त, गायत्री मंत्र-“ॐ बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्”- और बीज मंत्र “ॐ ह्लीं” का जाप भी लाभकारी बताया गया है। नियमित रूप से इन मंत्रों का उच्चारण करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और वाणी में प्रभाव बढ़ता है।
धार्मिक मान्यता है कि मां बगलामुखी की साधना से शत्रुओं पर विजय, न्यायालयीन मामलों में सफलता, भय से मुक्ति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा और सुरक्षा का संचार करती है।



