महाराष्ट्र में ‘महायुति’ का महाविजय: बीएमसी से ठाकरे परिवार का वर्चस्व खत्म, भाजपा सबसे बड़ी ताकत

महाराष्ट्र के हालिया निकाय चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए अपनी पकड़ को अभूतपूर्व रूप से मजबूत कर लिया है। देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में भाजपा-शिंदे गठबंधन (महायुति) ने 227 में से 118 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इसमें अकेले भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। इस जीत के साथ ही मुंबई नगर निगम पर पिछले करीब तीन दशकों से चले आ रहे ठाकरे परिवार के एकछत्र राज का अंत हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस जीत को ‘सुशासन और विकास’ की जीत बताया है।
मुंबई के अलावा, भाजपा ने महाराष्ट्र के अन्य प्रमुख शहरों में भी ‘क्लीन स्वीप’ किया है। पुणे नगर निगम में भाजपा ने 165 में से 119 सीटें जीतकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया, जबकि नागपुर में 102 सीटें और नवी मुंबई में 65 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी। नासिक, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। राज्य की कुल 29 नगर निगमों में से भाजपा-महायुति गठबंधन ने 25 से अधिक निगमों में अपना परचम लहराया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी मतदाताओं का यह रुझान आगामी 2029 के विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।
विपक्षी खेमे के लिए ये परिणाम बड़े झटके की तरह आए हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को मुंबई में केवल 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस 24 सीटों के साथ चौथे स्थान पर खिसक गई है। शरद पवार की एनसीपी (SP) और अजित पवार की एनसीपी भी शहरी इलाकों में कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाईं। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस सफलता का श्रेय जमीनी कार्यकर्ताओं और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को दिया है। भाजपा की यह विशाल जीत न केवल संगठनात्मक मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि महाराष्ट्र के शहरी मतदाता अब “विकास की राजनीति” को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।



