भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा: हापुड़ में तृतीय वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन, विद्वानों का समागम

हापुड़। के स्थानीय उत्सव पैलेस में भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा का तृतीय वार्षिकोत्सव धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रख्यात ज्योतिषाचार्यों, कर्मकांडी ब्राह्मणों और वेदाचार्यों ने शिरकत की। महासभा के अध्यक्ष और मुख्य आयोजकों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य भारतीय प्राचीन विधाओं—ज्योतिष, वास्तु और कर्मकांड—को आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिक बनाना और युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा। विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि ज्योतिष केवल भविष्यवाणियों का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन प्रबंधन का एक शुद्ध विज्ञान है।

वार्षिकोत्सव के दौरान आयोजित ‘ज्योतिष विमर्श’ सत्र में वर्तमान सामाजिक चुनौतियों और ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव पर गहन चर्चा हुई। आचार्यों ने मकर संक्रांति, आगामी ग्रहणों और संवत्सर के फलित पर अपनी भविष्यवाणी साझा की। महासभा द्वारा समाज में उत्कृष्ट सेवा करने वाले ज्योतिषाचार्यों और कर्मकांडी ब्राह्मणों को ‘ज्योतिष रत्न’ और ‘कर्मकांड शिरोमणि’ जैसे सम्मानों से विभूषित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद विद्वानों ने संस्कृत भाषा के संवर्धन और गुरुकुल पद्धति को पुनर्जीवित करने पर भी बल दिया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि कर्मकांड की शुद्धता ही देव पूजन का वास्तविक फल प्रदान करती है, इसलिए ब्राह्मणों का निरंतर स्वाध्याय अनिवार्य है।

तृतीय वार्षिकोत्सव के समापन सत्र में महासभा की भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों में निशुल्क ज्योतिष परामर्श केंद्र और कर्मकांड प्रशिक्षण शाला खोलने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ और विश्व शांति के लिए विशेष शांति पाठ किया गया। महासभा के पदाधिकारियों ने सभी आगंतुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया और समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार का संकल्प लिया। इस भव्य आयोजन ने न केवल हापुड़ की आध्यात्मिक पहचान को मजबूती दी, बल्कि ज्योतिष जगत के बिखरे हुए विद्वानों को एक मंच पर लाकर एकता का संदेश भी दिया।




