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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूल-अस्पताल के पास नहीं दिखेंगे आवारा कुत्ते

नई दिल्ली। सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वर्ष 2025 में दिए गए अपने महत्वपूर्ण आदेश को बरकरार रखते हुए उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन करने या उसे वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने संबंधित सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों को ऐसे स्थानों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि आवारा कुत्तों के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, लेकिन आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कोर्ट ने पुनर्वास और नसबंदी कार्यक्रमों को जारी रखने पर जोर देते हुए कहा कि इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना राज्यों और नगर निगमों की जिम्मेदारी है।

सुनवाई के दौरान कई याचिकाकर्ताओं ने पुराने आदेश में राहत देने और कुछ प्रावधानों में बदलाव की मांग की थी। हालांकि अदालत ने माना कि पहले जारी निर्देश संतुलित और आवश्यक हैं। कोर्ट ने कहा कि पशु कल्याण और नागरिक सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

देश के कई शहरों में आवारा कुत्तों के हमलों और काटने की घटनाओं को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही थी। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर कई राज्यों से शिकायतें सामने आई थीं। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अदालत का यह रुख नगर निकायों और प्रशासनिक एजेंसियों पर जिम्मेदारी बढ़ाएगा। अब स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा प्रभावित न हो और साथ ही पशु संरक्षण नियमों का भी पालन हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ पशु प्रेमी संगठनों ने फैसले पर चिंता जताई है, जबकि आम नागरिकों और कई सामाजिक संगठनों ने इसे जनहित में उठाया गया जरूरी कदम बताया है।

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