गाजियाबाद की हवा में घुला ज़हर: AQI 298 के साथ ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचा प्रदूषण

गाजियाबाद में आज, 5 जनवरी 2026 को वायु प्रदूषण के स्तर में एक बार फिर चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 298 दर्ज किया गया है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार ‘खराब’ (Poor) श्रेणी में आता है। कड़ाके की ठंड और हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषक तत्व धरातल के करीब जमा हो गए हैं, जिससे शहर के ऊपर धुंध की एक सफेद चादर छाई हुई है। लोनी और वसुंधरा जैसे इलाकों में तो स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ AQI का स्तर 300 के पार पहुँचने के कगार पर है। प्रशासन ने इस बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर संवेदनशील समूहों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
वायु गुणवत्ता बिगड़ने का मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर धूल, निर्माण गतिविधियाँ और वाहनों से निकलने वाला धुआं माना जा रहा है। सर्दियों के मौसम में होने वाला ‘थर्मल इन्वर्जन’ (Thermal Inversion) प्रदूषकों को वातावरण के ऊपर जाने से रोकता है, जिससे सांस लेना दूषित हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में PM 2.5 और PM 10 की अधिकता के कारण लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में हवा की गति तेज नहीं हुई या बारिश नहीं हुई, तो प्रदूषण का स्तर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में भी पहुँच सकता है।
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए गाजियाबाद नगर निगम और जिला प्रशासन ने ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (GRAP) के तहत सख्ती बढ़ा दी है। मुख्य सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है और निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, खुले में कूड़ा जलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्थानीय निवासियों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम की सैर से बचें और बाहर निकलते समय N-95 मास्क का प्रयोग करें। यह स्थिति हमें याद दिलाती है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास और कड़े नीतिगत निर्णय अब अनिवार्य हो चुके हैं।



