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अपरा एकादशी 13 मई को, प्रीति और विषकुंभ योग में होगा व्रत: ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय

हापुड़। अपरा एकादशी का पावन व्रत इस वर्ष 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा। श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा की महिला प्रदेशाध्यक्ष एवं ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया कि इस बार अपरा एकादशी विशेष संयोगों में आ रही है। रेवती नक्षत्र के बाद रात 8:55 बजे से प्रीति योग और विषकुंभ योग का शुभ संयोग बनेगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।

उन्होंने बताया कि एकादशी तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 2:52 बजे से प्रारंभ होकर 13 मई को दोपहर 1:29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 14 मई 2026 को प्रातः 5:31 बजे से 8:14 बजे के बीच किया जाएगा। द्वादशी तिथि 14 मई को सुबह 11:20 बजे समाप्त होगी।

ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय के अनुसार अपरा एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है और यह भगवान Vishnu को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत पापों का नाश करने वाला, पुण्य प्रदान करने वाला तथा जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और विष्णु कृपा प्राप्त होती है।

उन्होंने बताया कि व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही मानी जाती है। दशमी के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पूजा में अक्षत, रोली, फूल, तुलसी दल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना गया है।

इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप, विष्णु सहस्रनाम और विष्णु चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धालुओं को पूरे दिन उपवास रखते हुए सात्विक जीवन शैली अपनाने की सलाह दी गई है। चावल का सेवन इस दिन वर्जित माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति को समृद्धि, यश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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