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131वां संशोधन बिल फेल, महिला आरक्षण पर सरकार को झटका

नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को संविधान में प्रस्तावित 131वां संशोधन विधेयक मतदान के बाद पारित नहीं हो सका। यह बिल महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून में संशोधन से जुड़ा था। मतदान के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया, जिसके चलते यह महत्वपूर्ण विधेयक गिर गया।

संसद में हुई वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 230 सांसदों ने मतदान किया। हालांकि पक्ष में अधिक मत होने के बावजूद यह संख्या संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से कम रही, जिससे बिल पारित नहीं हो सका। इस परिणाम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े प्रावधानों पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। सरकार की ओर से Amit Shah ने बहस का जवाब देते हुए विधेयक के पक्ष में सरकार का रुख स्पष्ट किया।

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने मतदान के बाद जानकारी दी कि सरकार ने अन्य दो संबंधित संशोधन विधेयकों को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस बयान से संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे पर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती है।

यह विधेयक महिला आरक्षण कानून में कुछ बदलावों और उसके कार्यान्वयन से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट करने के उद्देश्य से लाया गया था। हालांकि, पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आगामी चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है, क्योंकि महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता बताया, जबकि सत्तापक्ष इसे आगे के लिए एक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।

फिलहाल, इस बिल के गिरने के बाद महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर आगे क्या रणनीति बनेगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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