मोहिनी एकादशी आज: ध्रुव योग में करें व्रत-पूजन, ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से जानें मंत्र और विशेष उपाय

हापुड़। मोहिनी एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इस वर्ष मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026, सोमवार को ध्रुव योग में मनाई जाएगी, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने इस व्रत के महत्व, पूजा विधि और विशेष उपायों की जानकारी दी।
ज्योतिर्विद के अनुसार, ध्रुव योग सुबह से लेकर रात 9:36 बजे तक रहेगा, जो स्थिरता और शुभ फल प्रदान करने वाला योग माना जाता है। हालांकि भद्रा काल सुबह 6:07 बजे से शाम 6:15 बजे तक रहेगा, ऐसे में नए शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी गई है, लेकिन पूजा-पाठ किया जा सकता है। एकादशी तिथि 26 अप्रैल शाम 6:06 बजे से शुरू होकर 27 अप्रैल शाम 6:15 बजे तक रहेगी, जबकि पारण 28 अप्रैल सुबह 5:43 से 8:21 बजे के बीच करना शुभ रहेगा।
उन्होंने बताया कि व्रत रखने वाले श्रद्धालु दशमी की रात से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और प्याज-लहसुन का त्याग करें। एकादशी के दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। प्रातः स्नान कर भगवान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पूजा में रोली, अक्षत, पुष्प, तुलसी, दीप और नैवेद्य अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है।
मंत्र जाप में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही तुलसी पूजन, पीपल वृक्ष की सेवा और खरबूजे का भोग लगाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि इस दिन किए गए उपायों से पापों का नाश, मानसिक शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इसके अतिरिक्त विष्णु सहस्रनाम का पाठ, जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान और केले के पेड़ की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। व्यापार में वृद्धि के लिए गोमती चक्र को पीले वस्त्र में बांधकर रखने की भी सलाह दी गई है।
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने कहा कि मोहिनी एकादशी का व्रत 10,000 वर्षों के तप के समान फल देने वाला माना जाता है और यह भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होता है।



