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स्मार्ट प्रीपेड मीटर में रिचार्ज के बाद भी नहीं आई बिजली तो जुर्माना तय: पावर कॉरपोरेशन को आयोग का नोटिस

लखनऊ। विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने उन मामलों पर कड़ी नाराजगी जताई है, जहां रिचार्ज कराने के बावजूद दो घंटे तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई।

आयोग के अनुसार, उपभोक्ताओं को रिचार्ज के तुरंत बाद या अधिकतम निर्धारित समय सीमा के भीतर बिजली मिलना चाहिए। यदि दो घंटे के भीतर कनेक्शन बहाल नहीं होता है, तो इसे “स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस” नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसी आधार पर आयोग ने पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला, तो कॉरपोरेशन पर एक लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकता है। आयोग ने इस संबंध में 15 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। इस सख्त रुख से यह साफ संकेत मिला है कि उपभोक्ता सेवाओं में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पिछले कुछ समय से स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ी हैं। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि रिचार्ज कराने के बावजूद उन्हें घंटों तक बिजली नहीं मिलती, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर गर्मी के मौसम में ऐसी स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

आयोग का कहना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर और पारदर्शी सेवा देना है, न कि उन्हें अतिरिक्त परेशानी में डालना। इसलिए बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

अब सभी की नजरें पावर कॉरपोरेशन के जवाब पर टिकी हैं। यदि आयोग जुर्माना लगाता है, तो यह उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा और भविष्य में बिजली सेवाओं में सुधार की उम्मीद बढ़ेगी।

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