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8 नवंबर को मनेगी दीपावली, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भैयादूज: भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा ने जारी किया शास्त्रसम्मत निर्णय

स्वाति नक्षत्रयुक्त अमावस्या में होगा मां लक्ष्मी का पूजन, 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान का विशेष महत्व

एडिटर इन चीफ: राजकुमार शर्मा

हापुड़,(लाईव न्यूज उत्तर प्रदेश)। दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैयादूज पर्व की तिथियों को लेकर चल रहे संशय पर भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा ने शास्त्रों एवं पंचांगों के गहन अध्ययन के बाद अपना निर्णय जारी किया है। महासभा के अनुसार वर्ष 2026 में दीपावली का पर्व 8 नवंबर रविवार को स्वाति नक्षत्रयुक्त अमावस्या में मनाया जाएगा। वहीं 9 नवंबर सोमवार को सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान, 10 नवंबर मंगलवार को गोवर्धन पूजा तथा 11 नवंबर बुधवार को भैयादूज का पर्व मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।

राजेंद्रनगर, हापुड़ स्थित महासभा के प्रधान कार्यालय पर विद्वानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न पंचांगों और धर्मग्रंथों का अवलोकन करने के बाद पर्वों की तिथियों एवं पूजन मुहूर्त पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। निर्णय की जानकारी देते हुए महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे से प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।

उन्होंने बताया कि धर्मग्रंथों में ‘स्वातिसंयुक्ते तदा दीपावली भवेत्’ का उल्लेख मिलता है। इसके अनुसार स्वाति नक्षत्रयुक्त प्रदोषकाल एवं निशीथकाल में पड़ने वाली कार्तिक कृष्ण अमावस्या पर मां लक्ष्मी का पूजन सुख-समृद्धि के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष यह विशेष योग 8 नवंबर रविवार को प्राप्त हो रहा है। वहीं उदयकाल में अमावस्या तिथि मिलने के कारण स्नान-दान 9 नवंबर को किया जाएगा।

धनतेरस से होगा पंचदिवसीय पर्व का शुभारंभ

महासभा के मंत्री पंडित देवी प्रसाद तिवारी एवं कोषाध्यक्ष पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले ने बताया कि पंचदिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस से होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, धन के स्वामी कुबेर और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे। धनतेरस पर स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना से पूजा-अर्चना की जाती है। परंपरा के अनुसार इस दिन सोना-चांदी, बर्तन अथवा धातु की वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।

7 नवंबर को नरक चतुर्दशी और हनुमान जन्मोत्सव

महासभा के समन्वयक पंडित अजय पाण्डेय एवं पंडित आशुतोष शुक्ला ने बताया कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर शनिवार को सुबह 10:48 बजे से प्रारंभ होकर 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसे नरक चतुर्दशी अथवा छोटी दीपावली कहा जाता है। इस दिन दीपदान, यमदीपक और हनुमानजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

उन्होंने निर्णयसिंधु के ‘कार्तिककृष्णचतुर्दश्यां प्रभाते चन्द्रोदयेऽभ्यङ्गं कुर्यात्’ शास्त्रीय प्रमाण का उल्लेख करते हुए बताया कि रूप चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर को सूर्योदय से पूर्व करना श्रेष्ठ रहेगा।

10 नवंबर को होगी गोवर्धन पूजा

महासभा के संरक्षक डॉ. वासुदेव शर्मा एवं परामर्श मंडल के विद्वान पंडित ओमप्रकाश पोखरियाल ने गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे से शुरू होकर 10 नवंबर को अपराह्न 2 बजे तक रहेगी।

धर्मग्रंथों में ‘प्रातर्गोवर्द्धनं पूज्य’ तथा भविष्य पुराण में प्रातःकाल प्रतिपदा की दो घड़ी की उपलब्धता पर पूजा एवं सायंकाल मंगलमालिका करने का विधान बताया गया है। इसी शास्त्रीय आधार पर मार्गपाली बंधन और मंगलमालिका के शुभयोग के साथ गोवर्धन पूजा 10 नवंबर मंगलवार को करना उचित रहेगा।

11 नवंबर को मनाई जाएगी भैयादूज

महासभा की महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय एवं उपाध्यक्ष पंडित गौरव कौशिक ने भैयादूज की तिथि को लेकर बताया कि यह अपराह्न कालीन पर्व है। द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होकर 11 नवंबर को अपराह्न 3:53 बजे तक रहेगी।

धर्मसिंधु के शास्त्रीय प्रमाण के अनुसार यदि दोनों दिनों में अपराह्न कालीन द्वितीया प्राप्त हो तो दूसरे दिन उदयातिथि के साथ पूर्ण अपराह्न काल मिलने पर पर्व मनाना श्रेष्ठ होता है। इसी आधार पर 11 नवंबर बुधवार को भैयादूज मनाना पूर्णतः शास्त्रसम्मत है।

धर्मग्रंथों के अध्ययन के बाद लिया गया निर्णय

महासभा के प्रवक्ता पंडित प्रशांत वशिष्ठ एवं पंडित अमर प्रकाश पाण्डेय ने बताया कि महासभा ‘एक राष्ट्र, एक पर्व, सही पर्व’ के उद्देश्य के साथ सनातन धर्म की एकता और धार्मिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित है। पर्वों की तिथियों का निर्धारण करते समय निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु, पुरुषार्थ चिंतामणि, तिथि व्रतराज, स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण, नारद पुराण और भविष्य पुराण सहित विभिन्न धर्मग्रंथों एवं पंचांगों का गहन अध्ययन किया गया है।

बैठक में पंडित जगदम्बा शर्मा, पंडित अनिल कुमार शुक्ला, पंडित शैलेन्द्र मिश्रा शास्त्री, एस्ट्रो धर्मेंद्र बंसल, पंडित शैलेन्द्र अवस्थी, पंडित आदित्य भारद्वाज, पंडित सर्वेश तिवारी, पंडित अभिषेक अवस्थी, पंडित संतोष तिवारी, पंडित पुरुषोत्तम दाहाल, पंडित अखिलेश शर्मा, पंडित हरीश शर्मा, डॉ. करुण शर्मा, पंडित माधव राम शर्मा, पंडित राहुल शर्मा, पंडित अजय त्रिपाठी, पंडित अजय शर्मा, पंडित ब्रजेश कौशिक एवं पंडित आशीष पोखरियाल सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे। सभी ने महासभा के निर्णय पर सहमति व्यक्त की। बैठक की अध्यक्षता महासभा अध्यक्ष पंडित केसी पाण्डेय काशी वाले ने की।

दीपावली एवं पंचदिवसीय पर्व के प्रमुख शुभ मुहूर्त

1. धनतेरस एवं भगवान धन्वंतरि पूजन

  • तिथि: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
  • श्रेष्ठ पूजन मुहूर्त: शाम 5:30 बजे से 7:57 बजे तक।
  • विशेषता: प्रदोषकाल एवं स्थिर लग्न।

धनतेरस खरीदारी मुहूर्त

  • 6 नवंबर सुबह 11:40 बजे से 7 नवंबर शनिवार सुबह 9:21 बजे तक।

2. दीपावली एवं मां लक्ष्मी पूजन

  • तिथि: 8 नवंबर 2026, रविवार
  • घर एवं प्रतिष्ठान पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 5:24 बजे से रात्रि 8:45 बजे तक।
  • विशेषता: स्वाति नक्षत्रयुक्त शुभ एवं अमृत चौघड़िया, स्थिर लग्न और आयुष्मान योग।

दीपावली निशीथकालीन पूजन

  • रात्रि 11:37 बजे से अगले दिन रात्रि 2:40 बजे तक।
  • विशेषता: निशीथकाल, सिंह लग्न एवं लाभ चौघड़िया।

3. अमावस्या स्नान-दान एवं बलि पूजन

  • तिथि: 9 नवंबर 2026, सोमवार।
  • विशेषता: सोमवती अमावस्या का विशेष शुभयोग।

4. गोवर्धन पूजा

  • तिथि: 10 नवंबर 2026, मंगलवार।
  • श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 7:11 बजे से दोपहर 1:23 बजे तक।

मार्गपाली बंधन एवं मंगलमालिका

  • अपराह्न एवं सायंकालीन मुहूर्त: शाम 5:27 बजे से 7:41 बजे तक।

5. भैयादूज स्नान, मंगल तिलक एवं भोजन

  • तिथि: 11 नवंबर 2026, बुधवार।
  • प्रथम शुभ मुहूर्त: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक।
  • द्वितीय शुभ मुहूर्त: दोपहर 1:22 बजे से अपराह्न 3:53 बजे तक।

विशेष सूचना: 8 नवंबर को दीपावली के दिन व्यवसाय एवं प्रतिष्ठान की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग लग्न और मुहूर्त में भी पूजन किया जा सकता है।

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