16 मई को रखा जाएगा वट सावित्री व्रत, सुहागिन महिलाएं करेंगी बरगद वृक्ष की पूजा

हापुड। श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा के प्रदेशाध्यक्ष सुबोध पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार को ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है।
महासभा की महिला प्रदेशाध्यक्ष प्रीति पांडे ने बताया कि वट वृक्ष की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना गया है। उन्होंने बताया कि प्रातः लगभग 7:12 बजे से 8:24 बजे तक विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त, जो दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक रहेगा, उसमें भी पूजा करना शुभ माना गया है।
उन्होंने बताया कि महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सोलह श्रृंगार के साथ व्रत का संकल्प लें। इसके बाद बरगद के पेड़ के पास या घर में वट की टहनी स्थापित कर सावित्री-सत्यवान की पूजा करें। पूजा में जल, दूध, गंगाजल, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, धूप, दीपक और मौली का उपयोग किया जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और तपस्या से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसे वट अमावस्या या बड़ा अमावस्या भी कहा जाता है।
ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया कि महिलाएं बरगद के वृक्ष के चारों ओर 7, 11 या 21 परिक्रमा करते हुए मौली बांधती हैं और अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। पूजा के बाद वट सावित्री व्रत कथा सुनने और आरती करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
उन्होंने कहा कि यह व्रत केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मजबूती का भी प्रतीक माना जाता है। पूजा के अंत में सत्तू, चना और अन्य प्रसाद वितरित किए जाते हैं।
महासभा के अनुसार, व्रत का पारण अगले दिन 17 मई, रविवार को किया जाएगा। इस अवसर पर महिलाओं से श्रद्धा और विधि-विधान के साथ व्रत एवं पूजा करने की अपील की गई है।



