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17 मई से शुरू होगा अधिक मास, जानिए क्या करें और क्या न करें : ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय

हापुड। श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा के प्रदेशाध्यक्ष सुबोध पांडे ने बताया कि इस वर्ष 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक अधिक मास रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार ज्येष्ठ माह दो बार पड़ रहा है, जिसमें एक शुद्ध ज्येष्ठ और दूसरा अधिक मास यानी मलमास माना जाएगा।

उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल से प्रारंभ हुआ वैशाख माह 16 मई को समाप्त होगा और 17 मई से ज्येष्ठ माह की शुरुआत होगी। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। पुनः 17 जून से शुभ कार्य शुरू हो सकेंगे।

प्रीति पांडे ने जानकारी दी कि भारतीय पंचांग में अधिक मास लगभग हर चौथे वर्ष आता है। यह चंद्रमा और सूर्य की गति में अंतर के कारण बनता है। चंद्र मास और सौर मास के समय अंतर को संतुलित करने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह समय साधना, पूजा-पाठ, दान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु, शिव और सूर्य देव की विशेष पूजा का महत्व बताया गया है।

पंडित सुबोध पाण्डेय के अनुसार अधिक मास में प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना, आदित्य हृदय स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम, हनुमान चालीसा, रामचरितमानस, श्रीमद्भागवत और गीता का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान सात्त्विक भोजन, ब्रह्मचर्य, संयम और व्रत का पालन करना शुभ होता है। साथ ही गरीबों, गौशालाओं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, घी तथा दीपदान करना विशेष पुण्यदायी माना गया है।

अधिक मास में गंगा स्नान, मंदिर दर्शन, सत्संग, भजन-कीर्तन और अधूरे धार्मिक संकल्प पूरे करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह समय आत्मिक उन्नति और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक मास केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी संदेश देता है।

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