विपक्ष का चुनावी शंखनाद: अखिलेश यादव की सांसदों संग रणनीति, रायबरेली में राहुल गांधी की ‘मनरेगा चौपाल’

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव आज लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में अपने सांसदों (लोकसभा और राज्यसभा) के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक कर रहे हैं। दोपहर 12:00 बजे शुरू होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी रणनीति तैयार करना है। अखिलेश यादव सांसदों से उनके संबंधित क्षेत्रों के फीडबैक लेंगे और केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) के खिलाफ जनमत जुटाने पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि सपा प्रमुख अपने सांसदों को ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले को और अधिक प्रभावी बनाने और स्थानीय मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाने के निर्देश देंगे।
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर हैं। राहुल गांधी आज ऊंचाहार के रोहनिया में एक भव्य ‘मनरेगा चौपाल’ का आयोजन करेंगे। इस चौपाल के माध्यम से वे मनरेगा योजना में केंद्र सरकार द्वारा किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान को गति देंगे। राहुल गांधी का आरोप है कि नया कानून ग्रामीण मजदूरों के रोजगार के अधिकारों को कमजोर करता है। चौपाल के बाद वे राजीव गांधी स्टेडियम में ‘रायबरेली प्रीमियर लीग टी20’ क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करेंगे और MPLADS के तहत हुए विकास कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। रायबरेली में लगे पोस्टरों में राहुल और अखिलेश को 2027 और 2029 का ‘कप्तान’ बताकर इंडिया गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया गया है।
विपक्ष की इन दोहरी गतिविधियों ने भाजपा खेमे में भी हलचल तेज कर दी है। अखिलेश यादव की लखनऊ में सांगठनिक बैठक और राहुल गांधी का रायबरेली में सीधा जनसंवाद यह दर्शाता है कि इंडिया गठबंधन उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ को ढीला नहीं होने देना चाहता। जहां कांग्रेस मनरेगा और ग्रामीण रोजगार के मुद्दे पर केंद्र को घेर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने सांसदों के जरिए 2027 की चुनावी बिसात बिछाने में जुट गई है। इन दोनों आयोजनों से निकलने वाले राजनीतिक संदेश आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करेंगे। विशेष रूप से, राहुल गांधी का यह दौरा स्थानीय कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और ग्रामीण वोट बैंक को एकजुट करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



